Chai and Shayari


वो मोहब्बत की वजह पूछते हैं,
जिन्हें हम बेवजह चाहते रहे।
वह सिसकने का सबब पूछते हैं,
जिन्हें हम अपनी सांसें मानते रहे।
वस्ल का दिन था, जवान थीं उमंगें,
दस्तूर-ए-मोहब्बत यूँ बदला उन्होंने।
हम पास आने का कहते रहे,
'नूरम' और वह दूर जाते रहे।

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