Chai and Shayari
. कुछ तो हमारे नर्म दिल का लिहाज़ किया होता, अमा शायर हो! थोड़ा तो बर्दाश्त किया होता।…
. कुछ तो हमारे नर्म दिल का लिहाज़ किया होता, अमा शायर हो! थोड़ा तो बर्दाश्त किया होता। अब क्या हम मोहब्बत का भ्रम भी न रखें? किस्सा जो शाद था, यूँ आम न किया हो…
Read more. सूरज भी लौट रहा था, और लौट रहा था मैं भी, वह लौट रहा था नभ में, मैं लौट रहा था घर को। हाँ, हम दोनों साथ ही लौटे थे, कल फिर से आने के लिए। वह आएगा सोते हुओं क…
Read more. बेटियां करें घमासान, अब जज भी है हैरान, ससुराल बन रहे शमशान, मेरा भारत महान।
Read more. वो मकां अब भी मेरा है या मुसाफ़िर हूँ कोई, 'नूरम', दिल में वो बसा भी है, और दिल में रहता भी नहीं।
Read more. डूब रहा था सूरज जब, मेरी हसरतों का उदय हो रहा था। वह देख रहा था तिरछी नज़रों से, 'नूरम' असर दिल पे हो रहा था। View this post on Instagram …
Read more. मेरे जागे से ख्वाबों में तुम हो, मेरे गीतों की शोखी में तुम हो, कुदरत के शाहकारों में तुम हो, चाँद की रोशनाई में भी तुम हो, अगर मैं साज़ होऊं कोई तो 'नूरम…
Read more. तेरी मोहब्बत में होकर बर्बाद, कहते हैं, कहते हैं वह बात जिसे राज़ कहते हैं। वो कर रहे हैं, मोहब्बत-ए-मौज़ू हमसे, वो कर रहे हैं, मोहब्बत-ए-मौज़ू हमसे, जो बराए…
Read more. कुछ तो हमारे नर्म दिल का लिहाज़ किया होता, अमा शायर हो! थोड़ा तो बर्दाश्त किया होता।…
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