Chai and Shayari


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"जब अश्क़ ग़म-ए-रूह से पूछता है कि क्या हुआ... तो अशआर बाहर आते हैं।
और फिर जब आँसू हाथों को सहारा देते हैं, तो लबों पे दुआ आती है।
शायरी, रूह से बात करना है, और शायरी ही रूह का ख़ुदा से हम-दोश होना भी है।"
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