Chai and Shayari

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बहते आंसुओं को क्या पता, क्या कह रहे हैं वो,
सिसकियों को क्या पता, क्या सुना रही हैं वो।
हाल तेरे दिल का मुझ तक, यूँ है पहुँचा 'नूरम',
जैसे परदेस से चाँदनी, चाँद को पुकार रही हो।

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