Chai and Shayari


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महताब की कसम महताब लगती हो,
केसर की कसम, कश्मीरी गुलाब लगती हो।
दरिया-ए-इश्क़ में वो कश्ती हो तुम,
'नूरम' जो मंज़िल का ख़्वाब देखती है।

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