Chai and Shayari

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तुम गुनाह हो तो सबसे बड़ा सवाब लगती हो,
कैसे छू लें, सुलगता हुआ आफ़ताब लगती हो।
बंदगी से पहले ही आपका सजदा कर बैठे हम,
'नूरम' ज़माने की हर बंदिश से मुकर गए हैं हम।


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