Outnow New Masihgeet

.
सूरज भी लौट रहा था,
और लौट रहा था मैं भी,
वह लौट रहा था नभ में,
मैं लौट रहा था घर को।

हाँ, हम दोनों साथ ही लौटे थे,
कल फिर से आने के लिए।
वह आएगा सोते हुओं को
जगाने के लिए,
मैं आऊँगा जागते हुओं को,
जगाने के लिए।

वह आएगा रोशनी लिए,
राह दिखाने के लिए,
मैं आऊँगा नूर लिए,
राह पर चलने के लिए।

जैसे वक़्त का बदलना,
ख़ुदा का दस्तूर है।
वैसे अच्छाई पर चलना,
ख़ुदावंद का हुक्म है।

सच्चाई पर चलना-चलाना,
अब यही मेरा प्रण है।
इसमें निहित मेरे प्राण हैं,
इसमें कृपा का निधान है,
और समाज का कल्याण है।
यह सब देशों की शान है।

Post a Comment

0 Comments