Chai and Shayari



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कुछ तो हमारे नर्म दिल का लिहाज़ किया होता,
अमा शायर हो! थोड़ा तो बर्दाश्त किया होता।
अब क्या हम मोहब्बत का भ्रम भी न रखें?
किस्सा जो शाद था, यूँ आम न किया होता। 
🙏

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