आप भाइयों और बहनों की मादावाद के डर और आतंक से भरी रीलें और शॉर्ट्स देखकर मैंने स्वयं से डरते-डरते कुछ सवाल किए हैं।
१. हिंदू परंपरा के षोडश संस्कारों (16 संस्कारों) में विवाह संस्कार है। यदि अंतिम संस्कार (अन्त्येष्टि) पहले आ जाए तो भाग्य और भोग-कर्म पर क्या प्रभाव होता है? इसका पाप लगता है क्या?
२. हिंदू परंपरा में विवाह संस्कार जीवन की निरंतरता का आधार है। यदि विवाह से पहले ही अन्त्येष्टि आने लगे, तो धर्म-पालनकर्ताओं की संख्या न्यून होने से हिंदू धर्म का अंत किया जा सकता है क्या?
३. क्या मात्र ज्ञान के बल पर धर्म को बचाया जा सकता है?
४. क्या यह हिंदुओं को हिंदू मैरिज एक्ट में फँसाकर धर्मान्तरण की कोई क्रूर साज़िश तो नहीं?
५. क्या मादावादी अली-मनी की आड़ में 'मवादी जिहाद' की नीव तो नहीं रख रहे हैं?
६. एक ही बेटी के औसतन दो शादियाँ कराने से माता-पिता पर अतिरिक्त बोझ तो नहीं डाला जा रहा है?
७. मादावादियों का प्रकोप आज़ादी के बाद से उग्र हो गया है। क्या यह फिर से देश की एकता पर कोई क्रूर संकट तो नहीं?
८. अन्य मतों की बात भी करनी अनिवार्य है। हिंद भूमि में पहरी 'सिख धर्म' और 'बौद्ध धर्म' का तर्क के लिए विशिष्ट स्थान है। सिख धर्म में आनंद कारज एवं बौद्ध धर्म में विवाह को मुख्यतः सामाजिक विधान कहा गया है। कहीं यह षड्यंत्र उनके लिए तो नहीं बनाया गया है और हम फँस गए हैं?
९. क्या मादावाद को आँकड़ों के आधार पर नरसंहार की सज़ा दी जा सकती है, या अभी धैर्य करना उचित रहेगा?
१०. क्या हम पुरुषों के तन, मन और धन की सुरक्षा देने में सक्षम हैं?
११. क्या मादावाद से पुरुषों और महिलाओं के बीच अविश्वास की भावना बढ़ी है?
१२. क्या मादावाद हिंदू परिवारों के टूटने का कारण और एकल परिवारों को बढ़ावा देने के लिए तो नहीं बनाया गया है, जिससे व्यक्तिगत रूप से भारतीयों को गरीब बनाकर देश को गरीब किया जा सके?
१३. क्या मादावाद का छुपा हुआ उद्देश्य समलैंगिक समाज की स्थापना तो नहीं है? क्यों धर्मों पर समलैंगिकता को स्वीकार करने का दबाव बनाया जा रहा है, और कुछ ने तो इसे स्वीकार भी कर लिया है?
१४. क्या यह भी विदेशी ताकतों का काम है, जैसा कि अक्सर पर-बुद्धिजीवियों द्वारा समझाया जाता है, या आंतरिक भूमि में इन विषैले बीजों का रोपण किया जा रहा है और देश की आधी आबादी को डँसा जा रहा है? क्या हमारे पास इस खेप का डेटा उपलब्ध है, या यह कोरोना महामारी की जन-अनहित में जारी हो जाएगा?
१५. क्या वैश्विक डेटिंग / फ्रेंडशिप / मैरिज बाज़ार को बढ़ावा देना और उनके द्वारा किसी ख़ास रंग, रूप, जेनेटिक डिसऑर्डर, धर्म या राष्ट्रीयता की महिलाओं को स्थायी नागरिकता दिला कर, भारत की बेटियों को हीन दिखाने और मानसिक रूप से बीमार करने का कोई परियोजना तो नहीं है?
१६. अंडाणु और वीर्य को क्रायोजेनिक तकनीक द्वारा सुरक्षित कर अधिक उम्र में बच्चा पैदा करने से संबंधित मेडिकल बाज़ार की संभावनाएँ मादावादियों द्वारा भारत में तलाशी गई हों?
१७. क्या मादावाद में ध्रुवीकरण की बू आती है?
१८. क्या हम पुरुष को एक साल क्या १०० सलून में भी में न्याय दिलाने में सक्षम हैं?
१९. क्या सरकार द्वारा पुरुष-विहीन राष्ट्र की परियोजना लीप-पोत कर या किसी छलावे से लागू की जा चुकी है?
२०. अन्य धर्मों की बात मतभेद न हो, इसलिए नहीं की गई है; इसके अतिरिक्त कोई अन्य कारण नहीं है। कृपया धार्मिक या राजनीतिक दृष्टिकोण लाकर नोट और वोट सिद्ध करने का प्रयास न करें। बात केवल मादावादियों के आतंक की की जा रही है, ताकि विश्व की आधी आबादी भी घर से बाहर निकलकर देश की तरक्की, एकता और अखंडता में योगदान दे सके।
"पूछता है विश्व- आधी आबादी मादावाद के डर और आतंक में जी रही है; क्या कर रहा है भारत ?"
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