Chai and Shayari

 .

उन्सियत हो गई उदासी से, 
जब मोहब्बत से नफ़रत हो गई।
पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम था जिन्हें, 
वो भी रिंद-ए-नियाज़ी हो गए।
ढूंढते थे महफ़िलों में सुकून-ओ-ख़रोश, 
अब तन्हाई के असीर हो गए।
'नूरम' तितली के पंखों के रंग न बदले, 
फूल महके और फिर सो गए।

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