Chai and Shayari



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मेरे जागे से ख्वाबों में तुम हो,
मेरे इन शोख गीतों में तुम हो,
चाँद की रोशनाई में भी तुम हो,
कुदरत के शाहकारों में भी तुम हो,
गर मैं साज़ होऊं कोई तो, 
'नूरम' उस साज़ के तार तुम हो।

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