Chai and Shayari

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दवा और दुआ से आगे का यह दर्द है,
इश्क़ कमबख़्त, बहुत आगे का मर्ज़ है।

नाकाम हुईं सब कोशिशें, नाकाम सब अमल हैं,
मोहब्बत के सैलाब में तिनके को भी लर्ज़ है।

यहाँ लिहाज़ को तहज़ीब से नहीं कोई ग़र्ज़ है,
'नूरम' यह वह अर्ज़ है, जिसमें ख़ुदा भी ख़ुदगर्ज़ है।

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