Chai and Shayari

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वो शख़्स अपना भी है और वो पराया भी, वो पसंद भी है और नापसंद भी,

तरतीब से उछाले हैं पत्थर उसने,'नूरम' घर बनाया भी है और दिल तोड़ा भी।


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