Chai and Shayari



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उनका दिया एक ज़ख़्म ही था काफ़ी,
ख़्वाबों की हक़ीक़त, मैं हक़ीक़त से जागी।
यादों में डसती, तन्हाई की बिजली,
आँखों को खोया है, बस आँसू हैं बाक़ी।

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