Chai and Shayari

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पेश-ए-ख़िदमत है दिल फिर एक बार,
टूटे दिल से यही फ़रियाद आती है।
धोखे खाने से अक़्ल नहीं आती, 'नूरम' 
याद आती है, बहुत ज़्यादा आती है।  



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