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होगा जब ज़िक्र, मेरा तेरी महफ़िल में,
होगा जब ज़िक्र, मेरा तेरी महफ़िल में,
और जब मेरा, नाम उछाला जायेगा,
तुझे रुलाएगा, तुझसे, न संभाला जायेगा।
होगा जब ज़िक्र कहीं आलम-ए-दीवानी होगा।
मेरे हालात की कश्ती में, तू भी डूबेगा,
मेरे हालात की कश्ती में, तू भी डूबेगा,
कोइ सहारा न होगा, दूर किनारा होगा,
प्यासा होगा तू भी, और पानी खारा होगा।
होगा जब ज़िक्र कभी 'नूरम' तेरी कहानी होगा।
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