Chai and Shayari

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होगा जब ज़िक्र, मेरा तेरी महफ़िल में,

होगा जब ज़िक्र, मेरा तेरी महफ़िल में,

और जब मेरा, नाम उछाला जायेगा, 

तुझे रुलाएगा, तुझसे, न संभाला जायेगा। 

होगा जब ज़िक्र कहीं आलम-ए-दीवानी होगा।  


मेरे हालात की कश्ती में, तू भी डूबेगा,

मेरे हालात की कश्ती में, तू भी डूबेगा,

कोइ सहारा न होगा, दूर किनारा होगा,  

प्यासा होगा तू भी, और पानी खारा होगा। 

होगा जब ज़िक्र कभी 'नूरम' तेरी कहानी होगा। 




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