Chai and Shayari

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ख़त का मज़मून पूछते हैं, हाल हमारा मालूम नहीं,
हम मर मिटे हैं जिन पर, उन्हें नाम भी मालूम नहीं।
किस कदर खड़े रहे हम, किस करवट हम बैठ जाएँ,
अब रहने दें या कुछ कहें, उन्हें फ़र्क़ भी मालूम नहीं।

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